Friday, January 8, 2016

Dalit student thrashed until he vomits for touching upper caste plates

Dalit student thrashed until he vomits for touching upper caste plates

January 3, 2016India,News,Top StoriesLeave a commentJodhpur: 

In a shocking incident, a lower caste Dalit student of a government school was beaten up by his teacher till he started vomiting for touching plates being reserved for the upper caste.According to media reports, the episode happened on October 1, a day before Gandhi Jayanti in Government Higher Secondary School in Osian town of Jodhpur, when a seven-year-old picked up a green coloured plate (reserved for the upper caste) where mid-day meal was being served."I picked up a plate reserved for upper caste students mistakenly and started having the rice on it. When the teacher saw this, he started hitting me badly on my head. I started vomiting," Ramesh, a Dalit, told TOI.According to Dalit Adhikar Network, "the plates there are coloured red and green for Dalits and upper castes, respectively. The seven-year-old had to be rushed to Umaid Hospital in Jodhpur. His treatment went on for six days."Malaram, father of the Dalit student, was also allegedly beaten up when he came to pick up his son from school."The cook in the school noticed Ramesh picking up a plate reserved for upper caste students. He complained about this to the teacher, who bashed up Ramesh. He kicked Ramesh and pulled his hair. He thrashed him severely, and this led to some internal injuries in his ears, because of which he still fears going to the school. When I visited the school, the teacher thrashed me too," said his father Mala Ram.On Thursday a public hearing was held by Dalit Adhikar Network at Pant Krishi Bhavan in collaboration with Action Aid and Jai Bhim Vikas Sikshan Sansthan and it came to fore that separate plates were kept for Dalit students and those belonging to a higher caste.A complaint has been filed against the teacher but police is yet to take any action against him. The district officer, elementary education, suspended the teacher and transferred him to Jodhpur. But the teacher is still present at that same school."

जातिगत जनगणना के फायदे

अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग महासंघ
जातिगत जनगणना के फायदे .........
१)अगर जातिगत जनगणना हो जाती है तो यह पता चल जाएगा की किस जात की कितनी संख्या है ,और उसको उस अनुपात में आरक्षण द्वारा सरकारी नौकरी दे दी जायेगी ,ताकि सभी जातियों की बेरोजगारी दूर कीजा सके !!
२)जातिगत जनगणना से यह जानकारी मिल जायेगी की कौन सी जात कितनी पढ़ी लिखी है और कौन से जात मेंकितने अनपढ़ है ताकि उन जातियों को विशेष रूप से एजुकेशन लेने के लिए प्रेरित किया जाय और उनकी अशिक्षा दूर की जा सके !!
३)जातिगत जनगणना से OBC की सही आबादी मालुम हो जायेगी ताकि बार बार हाई कोर्ट और सुप्रीमकोर्ट में बैठे ब्राह्मण यह न बोल सके की हमें ओबीसी की सही आबादी नहीं मालुम है इसलिए उनको रिजर्वेशन कितना दिया जाय यह हम नहीं कह सकत
4)जातिगत जनगणना से तह भी पता चल जाएगा की किस जातियों में कितने IAS IPS IRS IFS कितने टीचर कितने लेक्चरर कितने vice चांसलर है और कितने झाड़ू खाते में है कितने टेम्परेरी है कितने परमानेंट जॉब वाले है ताकि सारी असलियत सामने आ जाए की कौन सी जात का कब्ज्जा कहा है और कौन सी जात कहा कहासे गायब है !!
५)जातिगत जनगणना से सबसे ज्यादा फायदा 52% से जयादा आबादी वाले ओबीसी को होगा क्योकि संख्या मालूम होने पर ही वो उसी अनुपात में भारत के बजट में अपनी भागीदारी माग पायेगा ,मतलब अगर 20 लाख करोड़ का बजट है तो उसके हिस्से में 11लाख करोड़ रुपये आयेंगे
६)जातिगत जनगणना से यह भी पता चल जाएगा की कौन सी जातियों में महिलाए ज्यादा है और कौन सी जातियों में महिलाए कम है ,किस जात में बूढ़े ज्यादा है किस जात में बच्चे ज्यादा है ताकि उस हिसाब से कन्या भ्रूण ह्त्या ,बच्चो का कुपोषण रोका जा सक
े7) जातिगत जनगणना में यह भी पता चल जाएगा की किस जात के पास पक्का मकान है और किस जात के लोग फुटपाथ पर सोकर जीवन बिता रहे है ताकि गरीब और पिछड़ी जातियों को पक्के मकानों का बंदोबस्त कियाजा सके !
८) जातिगत जनगणना में यह भी पता चल जाएगा की किस जात के पास कितनी खेती है कितनी प्रोपर्टी हैऔर कौन सी जात भुखमरी से मर रही है ताकि उन जातियों की दशा सुधारने के लिए अलग से बजट का प्रावधान किया जा सके !
९)जातिगत जनगणना से सभी जातियों को आर्थिक सामाजिक भौगोलिक स्तिथि का सही आकलन हो पायेगा
१०) जातिगत जनगणना भारत में समानता स्थापित कर सभी लोगो को उनकी सभी प्राकृतिक और भौगोलिक संपदाओ में बराबर की भागीदारी सुनिश्चित करेगा
UNITY OF OBC - जागो ओबीसी जागो

 —  with Ssprasad Yadav, ओबीसी महासंघ उत्तर प्रदेश, Køli Bakul Makwana, Dinesh Bhartiye Spyfi, Abu Laeeq Siddiqui,Abhishek Yadav, A Anju Yadav, Abdul Naseer Nasir, Aap Qureshi, Abdullah Neta Ji, Abhai Kumar Verma, Aarohi Patel, Abdul Mujeeb Khan, Aarti Maurya,Aatif Khan, Abhay Mourya, Abigaely Silayo, Abhilash Rajput, Abhi Kumar,Aarti Kushwah, Abhass Bharat,Abhimanyu Simhmar, Abhay Kumar,Abhishek Kushwaha, ओबीसी महासंघ (remove), Abhiraj Mane, Abhishek Verma, Abhishek Shakya, Abhijit Pal,Abhishek Kashyap, Abhishek Singh,Abhishek Maurya, Abhi Kashyap, Abhay Pratap Singh Shakya, Abhishek Yadav,Aamir Jamal Siddiqui, Abhishek Kumar,Abhinav Kashyap, Abnish Kushwaha,Abhi Yadav, Abhaykumar Kushwaha,Abinash Bharti, Abhishek Maurya,Abhimanyu Maurya, Abhishek Arya,Abhishek Singh, Abhinandan Sahni andAbhijeet Maurya

Wednesday, January 6, 2016

हमें शासक बनाने के लिए डाॅ. बाबासाहेब आंबेडकर ने कहा था कि..

ब्राह्मण 3.5% अल्पसंख्यांक है, फिर भी भारत में ब्राह्मण समाज शक्तिशाली समझा जाता है- वे शासक वर्ग है, उनपर कोई अत्याचार नहीं होता है, क्योंकि, ब्राह्मण लोग प्राचीन काल से संगठित है- पहले वे "ब्राह्मण सभा" के माध्यम से संगठित थे; अभी वे RSS के माध्यम से संगठित है। संगठन ही शक्ति होती है। संगठन की मदद से कुत्ता भी शेर बनता है, लेकिन, संगठन के बिना शेर भी कुत्ता बन सकता है! 

प्राचीन काल में ब्राह्मण लोगों की ब्राम्हण सभा हर गांव, हर नगर में कार्यरत रहती थी; अभी उनका RSS संगठन हर गली, हर गांव, हर शहर में कार्यरत हैं। इस सामाजिक संगठन की मदद से ब्राम्हण लोग देश की व्यवस्था अपने कब्जे में रखते हैं। राजा कोई भी हो, लेकिन, उसके राज्य पर, अर्थात, व्यवस्था पर ब्राह्मणों का कब्जा रहता है! इसलिए, भारत में कई राजा हुए, मुगल बादशाह हुए, लेकिन, व्यवस्था ब्राह्मणों की ही रही। वर्तमान में भी कहने को लोकशाही है, लेकिन व्यवस्था पूर्णतः RSS के कब्जे में हैं।

हमारा मुलनिवासी समाज बहुसंख्यांक है, इसलिए बहुजन कहलाता है, लेकिन हमारा कोई भी देशव्यापी सामाजिक संगठन नहीं है। हमारे हजारों छोटेमोटे राजकीय या धार्मिक संगठन है, लेकिन देशव्यापी सामाजिक संगठन एक भी नहीं है। इसलिए, हम समस्याओं से घिरे हैं; क्योंकि हम गुलाम है और समस्या गुलामों की ही होती है। ब्राह्मण स्वतंत्र है, इसलिए देश में उनकी कोई समस्या नहीं है।

अर्थात, संगठन के अभाव की वजह से हम समस्याग्रस्त और गुलाम है। क्योंकि, संगठन के अभाव में समाज भीड में तब्दील हो जाता है। हमारे लोग करोडों की संख्या में है- भारत में SC 15 करोड है, ST 8 करोड है, मुस्लिम 18 करोड है,  OBC लगभग 60 करोड है; लेकिन यह सारे लोग सामाजिक लेवल पर विभाजित है, इसलिए भीड में तब्दील हुए हैं। 

भीड का एक ही वसूल होता है कि, उसका सिर्फ इस्तेमाल होता है और उसे जैसा चाहे वैसा हाँका जाता है। इसलिए, भीड केवल गुलाम बन सकती है, शासक नहीं!!

अर्थात, हम भीड में तब्दील हुए हैं, इसलिए गुलाम है। हमें शासक बनाने के लिए डाॅ. बाबासाहेब आंबेडकर ने कहा था कि, पहले शिक्षित बनो, संगठित बनो और फिर शासक बनो। हमारे लोग देशव्यापी संगठन बनाते नहीं, लेकिन, शासक बनने के सपने मात्र हरदिन देखते हैं! हमारे बहुजन समाज को विदेशी ब्राह्मणों की गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए बामसेफ ने "भारत मुक्ति मोर्चा" इस देशव्यापी सामाजिक संगठन (National social organisation) का निर्माण किया है। सभी मुलनिवासी बहुजनो से अनुरोध है कि, इस संगठन में खुलकर काम करें।

जय मुलनिवासी।

फेसबुक एवं मनु

Facebook and manu फेसबुक
एवं मनु
अगर मनु महाराज ने फेसबुक का निर्माण किया होता तो उसके नियम कुछ इस तरह होते1. ब्राह्मण फेसबुक को हमेशा प्रयोग कर सकता है ।2. क्षत्रिय फेसबुक को दिन में सौलह घंटे प्रयोग कर सकता है ।3. वैश्य फेसबुक को दस घंटे प्रयोग कर सकता है ।4. शूद्र फेसबुक को रात के बारह बजे से दो बजे तक प्रयोग कर सकता है बशर्ते उससमय उपरोक्त तीनो वर्ण का कोई सदस्य ऑनलाइन नहीं हो ।5. अछूत फेसबुक को सिर्फ दो बजे से तीन बजे तक प्रयोग कर सकते हैं बशर्ते उपरोक्त चारों वर्ण के व्यक्ति मौजूदना हो ।6 . ब्राह्मण सिर्फ पोस्ट लिखेंगे कभी लाइक या कमेंट नहीं करेंगे । ब्राह्मण कमेंट तभी करेंगे जब कोई उनकी पोंगा पंथी पर चोट करेगा ।7. क्षत्रिय सिर्फ ब्राह्मणों के पोस्ट लाइक करेगा और पोंगापंथी के खिलाफ लिखने वालो को जमकर धमकी देगा । क्षत्रिय अपनी पोस्ट भी लिख सकता है । क्षत्रिय का मुख्य कार्य ब्राह्मणों के द्वारा लिखी पोस्टों की रक्षा करना है ।8. वैश्य सिर्फ ब्राह्मण और क्षत्रिय की लिखी पोस्टों को शयेर करेगा ।9. शूद्र इन तीनों की लिखी पोस्टों से दूर रहेगा अगर उसने गलती से भी इन पोस्टों को लाइक कर दिया तो उसको तत्काल प्रभाव से ब्लाक कर दिया जायेगा । कमेंट करने पर उसका मोबाइल जब्त कर लिया जायेगा ।10. अछूत सिर्फ अपनी पोस्टों पर ही लाइक और कमेंट करेंगे अगर उन्होंने चारो वर्णों के सदस्यों की पोस्ट पर लाइक या कमेंट करने की कोशिश की तो उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर पोस्टकी शुद्धि हेतु पोस्ट को हटाकर दोबारा लिखा जायेगा और पोस्ट को दोबारा लिखने से पहले मोबाइल और कंप्यूटर को गौ मूत्र से नहलाकर पवित्र किया जायेगा ।11. फेसबुक का उपयोग स्त्रियों के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित है । स्त्रियों को फेसबुक पर आने से रोकने के लिए विशेष इंतजाम किये गए हैं ।

आरक्षण को लेकर भ्रम और तथ्य

आरक्षण को लेकर भ्रम और तथ्य

January 4, 2016, 12:38 PM IST 

रिजर्वेशन यानी आरक्षण एक ऐसा मुद्दा है जो समय-समय पर देश में चर्चा का मुख्य विषय बन जाता है। देश की ज्यादातर जनता, खासकर नई जनरेशन का अधिकतर हिस्सा भी आरक्षण के बारे में उन्हीं बातों को जानता है जिसे वह मीडिया के माध्यम से सुनता-पढ़ता है।

पिछले दिनों एक मैगजीन में आरक्षण विषय पर पूर्व आईएएस अधिकारी पी.एस. कृष्णन का लेख पढ़ा। 'आरक्षण के तथ्य और मीडिया में गलत बयानबाजी' नाम के इस लेख के अनुसार आरक्षण को लेकर जनता में कई तरह की गलतफहमियां हैं, और कई मीडियाकर्मी भी इस बारे में अल्पज्ञान रखते हैं। इस लेख के कुछ अहम अंश आप सभी से साझा करना चाहता हूं।

भ्रमः इस देश में आरक्षण की शुरुआत वोट के भूखे राजनेताओं ने शुरू की थी।

तथ्यः पहली बार आरक्षण की शुरुआत 1902 में कोल्हापुर के राजा छत्रपति साहू जी महाराज ने की थी। फिर 1921 में मैसूर के महाराजा ने आरक्षण लागू किया था। 1921 में ही मद्रास प्रेसिडेंसी (वर्तमान तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल का उत्तरी हिस्सा और कर्नाटक का कुछ हिस्सा आता है।) में जस्टिस पार्टी ने आरक्षण की शुरुआत की थी। यहां गौरतलब है कि ब्राह्मण एकाधिकार को चुनौती देते हुए और उसका दमन करने के वादे के आधार पर ही जस्टिस पार्टी सत्ता में आई थी। इस तरह आरक्षण की शुरुआत राजाओं और भारतीय राजनीतिज्ञों द्वारा की गई थी।

भ्रमः 1950 में भारत के संविधान के बाद आरक्षण की शुरुआत हुई थी।

तथ्यः राष्ट्रीय स्तर पर अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण को डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की पहल पर 1943 में ही लागू किया गया था। उन्होंने यह समझ लिया था कि अंग्रेजों के बाद जिनके हाथों में भारत की बागडोर होगी, वे अनुसूचित जातियों को आरक्षण व अन्य सहूलियत देने में हिचकिचाएंगे। यही कारण था कि वह वायसरॉय के कार्यकारी परिषद में बतौर सदस्य शामिल हुए थे।

भ्रमः संविधान द्वारा सिर्फ दस वर्षों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया था।

तथ्यः आरक्षण की तीन श्रेणियां हैः

राज्यों के पदों और सेवाओं में आरक्षण (सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, सार्वजनिक क्षेत्र के बैकों, यूनिवर्सिटी और अन्य संस्थाओं सहित सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुच्छेद 12 की व्याख्यानुसार स्टेट का दर्जा प्राप्त संस्थाएं।)शिक्षण संस्थानों की सीटों में आरक्षण।लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों में सीटों का आरक्षण। आमतौर पर जिसे राजनीतिक आरक्षण के रूप में संबोधित किया जाता है।

इनमें से केवल तीसरी श्रेणी के आरक्षण के लिए शुरू में 10 वर्षों का प्रावधान था। जबकि एक और दो श्रेणी के आरक्षण के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं थी। बहुत सारे विद्वान और ऐंकर तीसरी श्रेणी की 10 साल की समयसीमा को पहले और दूसरे श्रेणी के लिए भी बताते हैं जबकि उनके लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं थी।

भ्रमः आरक्षण का उद्देश्य गरीबी खत्म करना या कम करना है।

तथ्यः संविधान के अनुसार आरक्षण का उद्देश्य गरीबी कम करना या खत्म करना कभी नहीं रहा। बेरोजगारी के समाधान हेतु आरक्षण को एक युक्ति के तौर पर कभी नहीं लिया गया। आरक्षण का उद्देश्य शासन और प्रशासन के ढांचे में असंतुलन को ठीक करना था। इसका उद्देश्य शिक्षा और चुनावी सीटों की उस संरचना को मजबूती प्रदान करना था जो भारतीय जाति व्यवस्था द्वारा निर्मित असंतुलन और असमानता के कारण बना था।

साफ शब्दों में कहा जाए तो शासन व प्रशासन में से उच्च जातियों के एकाधिकार को खत्म करते हुए सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ी जातियों/जनजातियों को समान अवसर उपलब्ध करवाने के लिए ही इस आरक्षण की व्यवस्था की गई थी।

हालांकि इस संबंध में कई लोगों का कहना है कि आरक्षण को आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर लागू करना चाहिए, लेकिन संविधान में नहीं निर्देशित होने के कारण आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था नहीं होती है।

यह कॉन्टेंट अंग्रेजी की मास मीडिया मैगजीन के अंक 45 से लिया गया है और यहां उसका संक्षिप्त हिंदी अनुवाद पेश किया जा रहा है। मूल लेखक पी. एस. कृष्णन समाज कल्याण मंत्रालय में पूर्व सचिव रहे हैं और आरक्षण को लेकर इन्होंने बहुत काम किया है। वर्तमान में यह तेलंगाना सरकार में कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त सलाहकार हैं।

किसी भी व्यक्ति और समूह को गुलाम कब कहा जाता हैं, यह वास्तव में महत्वपुर्ण सवाल हैं

किसी भी व्यक्ति और समूह को गुलाम कब कहा जाता हैं, यह वास्तव में महत्वपुर्ण सवाल हैं। कोई भी व्यक्ति या समूह जब पराजित हो जाता है, तब विजेता लोग उसको गुलाम बना देते हैं। मगर पराजित लोग इसका अपने ताकत के अनुरूप में
विरोध करते हैं। प्रारंभ में यह होता है, मगर धीरे धीरे जो लोग पराजित होते हैं, वह लोग अपना इतिहास और अपने तौर तरीके भूलने लगते हैं, अपना वजूद भुलने  लगते हैं, तो वे अपनी अस्मिता और असली पहचान भी भुलने लगते हैं। इस तरह से उनकी पहचान धीरे धीरे समाप्त हो जाती हैं । जैसे ही, उनकी पहचान समाप्त हो जाती हैं, वे अपना इतिहास और अपने पूर्वजों का गौरव भी भूल जाते हैं, तब उन्हें अपने स्वाभिमान का अहसास होना भी समाप्त हो जाता हैं और वे गुलाम बन जाते हैं। जब इन गुलामों की अपनी पहचान समाप्त हो जाती हैं, तब वे विजयी लोगों का अनुकरण और 
अनुसरण करना शुरू कर देते हैं। जब यह अनुकरण और अनुसरण शुरू हो जाता हैं, तो इन पराजित लोगों का अपना मूल अस्तित्व समाप्त हो जाता है । 

अपना मूल अस्तित्व खोने की वजह से ये लोग विजेताओं की परंपराओं का अनुसरण करके अपना अस्तित्व और अपनी पहचान मिटाना शुरू कर देते हैं। यही पर गुलामों की गुलामी का अहसास समाप्त हो जाता हैं । 

जब गुलामों को गुलामी का एहसास होना बंद हो जाता है, तब उसी वक्त कोई भी जाती या समूह वास्तव में गुलाम बन जाता हैं । 

ऊपर उल्लेखित धारणा से अगर देखा जाए, तो यहां का मूलनिवासी भारतीय वास्तव में गुलाम हैं। भारत के अलावा दूसरे देशों में भी गुलाम बनाए गए हैं, मगर उन गुलामों को शिक्षा के अधिकारों से वंचित नहीं किया गया था। लेकिन भारत मे शिक्षा के अधिकारों से मूलनिवासी गुलामों को वंचित कर दिया गया था, जिससे भारत का मूलनिवासी केवल गुलाम नहीं रहा, बल्कि, वह विदेशी ब्राह्मणों का पक्का गुलाम हुआ। हम इसे पक्का गुलाम इसलिए कहते हैं, क्योंकि, मूलनिवासी गुलाम लोग अपने गुलामी का गर्व और गौरव करते हैं; गुलामी मे सुख और आनंद का अनुभव करते हैं। विजेताओं की परंपराओं का यानी युरेशियन ब्राह्मणों की परंपरा, धर्म, संस्कार, समाज व्यवस्था का वे केवल अनुकरण और अनुसरण नहीं करते; 
बल्कि, गर्व और गौरव भी करते है। युरेशियन ब्राह्मणों ने दिया हूआ यह नारा, "गर्व से कहो हम हिंदू हैं", इसका हम मूलनिवासी लोग गर्व और गौरव से प्रतिध्वनित करते हैं। यही इस बात का सबूत हैं की, हम हमारे गुलामी का गर्व और गौरव करते हैं। इस स्थिति से मूलनिवासीयों को ब्राह्मणों के गुलामी से मुक्त करने की आवश्यकता हैं। मूलनिवासीयों को किसने गुलाम बनाया है, यह बात तो सर्व विदित हैं कि,  वर्ण व्यवस्था, जाती व्यवस्था और अस्पृश्यता यह युरेशियन ब्राह्मणों के बड़े हथियार हैं। इन हथियारों का प्रयोग और उपयोग करके उन्होंने हम मूलनिवासीयों को पराजित किया और हमें पराजित करने के लिए कई साजिशे, हथकंडे अपनाये। यह सब करने वाले लोग युरेशियन ब्राह्मण ही थे। इस तरह से, मूलनिवासीयों को गुलाम बनाने वाले लोग युरेशियन ब्राह्मण ही हैं। 

जिन लोगों के पास विचारधारा नहीं होती, जो लोग अपने दुश्मनो को ठीक से नहीं पहचानते, अपने दोस्तों को ठीक से नहीं पहचानते, जिनको इतिहास का सम्यक आकलन नहीं होता, जिनके पास व्यवस्था परीवर्तन का शास्त्र और शक्ति नहीं होती और उस शक्ति का प्रयोग और उपयोग करने का ज्ञान और कुशलता नहीं होती वे लोग जागरूक नहीं होते। इस तरह से जो लोग जागरूक नहीं होते हैं, वे अज्ञानी और मुढ बने रहते हैं और जो लोग जागरूक रहते हैं, वे लोग इन लोगों को अपनी जागिर बना लेते हैं, अपनी संपत्ति मानना शुरू करते हैं और गुलाम बनाते हैं।

 युरेशियन ब्राह्मणों ने भी यही किया और वर्तमान में भी वे यही कर रहे हैं। इसलिए, युरेशियन ब्राह्मण ही मूलनिवासी भारतियों के शत्रु हैं और इनसे हमें सजग रहना होगा।satwant singh rana  UP       Bharti vidhyarthi morcha
                                                         - मा. वामन मेश्राम,
राष्ट्रीय अध्यक्ष, Bamcef and 
भारत मुक्ति मोर्चा

Monday, January 4, 2016

Fwd: Jobs in 2016 by Bhagat Jobs Network



---------- Forwarded message ----------
From: Nikhil Sablania <sablania.nikhil@gmail.com>
Date: Tuesday, January 5, 2016
Subject: Jobs in 2016 by Bhagat Jobs Network
To: sablania.nikhil.amne@blogger.com, ambedkartimes <sablanian2@gmail.com>, Chanchal Sablania <sablaniac@gmail.com>


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Bhagat Mahasabha Govt.Jobs Updates Free Service to Megh samaj. 02.01.2016
Prof.Raj Kumar Bhagat,National President,Bhagat mahasabha(Regd.).
* Reserve Bank of India – RBI Recruitment 2016 – Technical Attendant Vacancy – Last Date 13 January 2016
* Pawan Hans Limited Recruitment 2016 – 03 Jr. Assistant/Steno-Typist Vacancy – Last Date 15 January 2016
* Lok Nayak Hospital (Government of Delhi) Recruitment 2016 – 10 Senior Residents Vacancy – Walk-in-Interview 06 January 2016
* Assistant Professor vacancy in NIT Srinagar last date 15th Feb-2016
* Punjab PSC Lecturer Technical Education vacancy last date 20th Jan-2016
* Faculty and other posts in BGSBU Rajouri last date 16th Jan-2016
* BGSBU Rajouri Faculty posts last date 20th Jan-2016
* BGSBU Rajouri Faculty posts last date 20th Jan-2016
* Various Job vacancies by Himachal High-Court last date 8th Jan-2016
* Faculty vacancy in Anand Agricultural University last date 30th Jan-2016
* AIIMS Bhubaneswar Special Drive for Staff Nurse post last date 5th Feb-2016
* Airports Authority of India – AAI Recruitment 2016 – 200 Junior Executive (ATC) Vacancy – Last Date 09 February 2016
* Union Bank Development Leader vacancy last date 2nd Jan-2016
* Steel Authority of India – SAIL Recruitment 2016 – Aircraft Maintenance Manager Vacancy – Last Date 05 January 2016
* Directorate of Medical Education Recruitment 2016 – 59 Demonstrator Vacancies – Last Date 12 January 2016
* National Institute of Malaria Research – NIMR Recruitment 2016 – 06 Laboratory Technician, Data Entry Operator & Various Vacancies – Walk-in-Interview 05 & 06 January
* Deep Chand Bandhu Hospital (Government of Delhi) Recruitment 2016 – 12 Senior Resident & Junior Resident Vacancy – Walk-in-Interview 05 January 2016
* National Research Centre for Citrus – NRCC Recruitment 2016 – Technical Field Assistant Vacancy – Walk-in-Interview 05 January
* WAPCOS Limited Recruitment 2016 – 15 Junior Engineer Vacancy – Last Date 05 January 2016
* Guru Angad Dev Veterinary and Animal Sciences University – GADVASU Recruitment 2016 – 02 Veterinary Instructor Vacancy – Walk-in-Interview 08 January 2016
* Reserve Bank of India – RBI Recruitment 2016 – Technical Attendant Vacancy – Last Date 13 January
* MP PSC District Public Prosecution Officer recruitment last date 13th Feb-2016
* Engineer recruitment in Bangalore Metro Rail last date 6th Jan-2016
* Syndicate Bank Probationary Officers posts by Diploma in Banking 2015
* Job posts in Hindustan Insecticides Limited last date 14th Jan-2016
* RVSKVV Faculty and other Job posts last date 1st Feb-2016
* UPSC Recruitment 2016 – 22 Chemical Examiners, Specialist Grade-III Assistant Professors & Various Vacancies – Last Date 14 January
* Specialist Officer posts in Canara Bank last date 12th Jan-2016
* Various Job posts in Bureau of Indian Standards last date 1st Feb-2016
* Civil Engineer Jobs in Konkan Railway Kashmir project last date 12th Jan-2016
* Recruitment for Job posts by UP PSC last date 21st Jan-2016
Bhagat Mahasabha Govt.Jobs Updates Free Service to Megh samaj. 02.01.2016
Prof.Raj Kumar Bhagat,National President,Bhagat mahasabha(Regd.).
* Reserve Bank of India – RBI Recruitment 2016 – Technical Attendant Vacancy – Last Date 13 January 2016
* Pawan Hans Limited Recruitment 2016 – 03 Jr. Assistant/Steno-Typist Vacancy – Last Date 15 January 2016
* Lok Nayak Hospital (Government of Delhi) Recruitment 2016 – 10 Senior Residents Vacancy – Walk-in-Interview 06 January 2016
* Assistant Professor vacancy in NIT Srinagar last date 15th Feb-2016
* Punjab PSC Lecturer Technical Education vacancy last date 20th Jan-2016
* Faculty and other posts in BGSBU Rajouri last date 16th Jan-2016
* BGSBU Rajouri Faculty posts last date 20th Jan-2016
* BGSBU Rajouri Faculty posts last date 20th Jan-2016
* Various Job vacancies by Himachal High-Court last date 8th Jan-2016
[02/01 12:23 am] Prof.Raj Kumar Bhagat: * Faculty vacancy in Anand Agricultural University last date 30th Jan-2016
* AIIMS Bhubaneswar Special Drive for Staff Nurse post last date 5th Feb-2016
* Airports Authority of India – AAI Recruitment 2016 – 200 Junior Executive (ATC) Vacancy – Last Date 09 February 2016
* Union Bank Development Leader vacancy last date 2nd Jan-2016
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* Directorate of Medical Education Recruitment 2016 – 59 Demonstrator Vacancies – Last Date 12 January 2016
* National Institute of Malaria Research – NIMR Recruitment 2016 – 06 Laboratory Technician, Data Entry Operator & Various Vacancies – Walk-in-Interview 05 & 06 January
* Deep Chand Bandhu Hospital (Government of Delhi) Recruitment 2016 – 12 Senior Resident & Junior Resident Vacancy – Walk-in-Interview 05 January 2016
* National Research Centre for Citrus – NRCC Recruitment 2016 – Technical Field Assistant Vacancy – Walk-in-Interview 05 January
* WAPCOS Limited Recruitment 2016 – 15 Junior Engineer Vacancy – Last Date 05 January 2016
* Guru Angad Dev Veterinary and Animal Sciences University – GADVASU Recruitment 2016 – 02 Veterinary Instructor Vacancy – Walk-in-Interview 08 January 2016
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* MP PSC District Public Prosecution Officer recruitment last date 13th Feb-2016
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* Syndicate Bank Probationary Officers posts by Diploma in Banking 2015
* Job posts in Hindustan Insecticides Limited last date 14th Jan-2016
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* Specialist Officer posts in Canara Bank last date 12th Jan-2016
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* Civil Engineer Jobs in Konkan Railway Kashmir project last date 12th Jan-2016
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